🎵 नेता, साहेब, अफ़साना (Political Satire Version)
मुखड़ा:
नेता, साहेब, अफ़साना
चालाक, मौक़ापरस्त, बहाना
सियासत ने ये नाम हमको दिए हैं
तुम्हें जो जँचे हो, वही दोहराना
भाषण जाना
नेता, साहेब, अफ़साना …
अंतरा 1:
चमकती कुर्सी, सत्ता की रवानी
हमें यूँ ही बहलाते जा
विकास के नारे, खोखली कहानी
हर बार वही दोहराते जा
माना है तू सबसे तेज़ ज़ुबानी
टीवी पे लगती है शेर-जवानी
लेकिन गली में सच जो दिख जाए
फाइलों में कर देता है पानी
दलाल, चमचा, हरजाई
चालाक, मौक़ापरस्त, बहाना
नेता, साहेब, अफ़साना …
अंतरा 2:
अरे वादों वाली, बातों वाली
जनता को तूने जाना नहीं
रोज़गार की थाली, महँगाई की ज्वाली
कभी नीचे झुक के माना नहीं
गुलाबों की माला, नारों की थाली
हर चुनाव में सजती कहानी
कुर्सी से नीचे झाँक के देखो
सड़कों पे सोती है ज़िंदगानी
दलित, मज़दूर, किसान
सब बनते हैं बस निशाना
चालाक, मौक़ापरस्त, बहाना
ब्रिज (तेज़ कटाक्ष):
सच बोले जो, वो देशद्रोही
सवाल करे, वो गद्दार बना
तालियाँ बजती झूठ पे भारी
ईमान अकेला शर्मिंदा खड़ा
आउट्रो:
प्रेम नहीं अब पोस्टर में
ईमान नहीं है भाषण में
जो पूछे “हिसाब दो” साहब
वो लिख दिया जाता है फाइलन में
नेता, साहेब, अफ़साना
चालाक, मौक़ापरस्त, बहाना
सियासत ने ये नाम हमको दिए हैं
तुम्हें जो जँचे हो, वही दोहराना

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